अहम है मुख्यमंत्री का छुटिट्यां रद्द करने का फैसला

 अहम है मुख्यमंत्री का छुटिट्यां रद्द करने का फैसला


छुट्टियों का नाम आते ही सबका मन मचल उठता है। पहले से ही घूमने की योजनाएं बनाने लगते हैं। हमारे देश में जहां कर्मशील लोग हैं वहीं आरामपसंद लोग भी रहते हैं। इतवार की छुट्टी के तुरंत बाद ही अगली छुट्टी खोजने लगते हैं। वहीं महापुरुषों के नाम पर मिली छुट्टी तो उनकी खुशी में चार चांद लगा देती है। यह छुट्टियां उन्हें फ्री में मिली छुट्टी के समान लगती है।  महापुरुषों के नाम पर छुट्टी का चलन लोकप्रिय हो  गया है। लगभग हर नई सरकार अपने कार्यकाल में एक न एक छुट्टी बढ़ाती ही रही है। कभी उनकी जन्मतिथि पर तो कभी उनकी पुण्यतिथि पर। महापुरुषों के नाम  पर छुट्टियों का यह सिलसिला निरंतर बढ़ता ही जा रहा था। लगभग हर साल छुट्टियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही थी । जिन महापुरुषों के नाम पर छुट्टियां होती हैं  ,वह अपने जीवन में बिना रुके ही काम करते रहें ।  उन्होंने अपने जीवन में आराम को हराम समझाकर, देश के प्रति अपने कर्तव्य निभाते रहे । वैसे ही हम सब को अपने कर्तव्य निभाने चाहिए।  उन्होंने परिश्रम को ही अपना परम कर्तव्य समझा,तो फिर उनकी जन्म तिथि पर उनके जीवन से प्रेरणा लेकर हम सभी को अपने आने वाली पीढ़ियों को उन्हीं के जैसे कर्म करने की सीख क्यों नहीं देनी चाहिए जो उनके लिए वास्तविक श्रद्धांजलि होगी । भारत एक विकासशील देश है और विकास के लिए परिश्रम ही एकमात्र उपाय है।यही परिश्रम भारत को विश्व पटल के शिखर पर पहुंचाएंगा।

ऐसे में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंबेडकर जयंती पर महापुरुषों के नाम पर होने वाली  छुट्टियों को रद्द करने की बात कही है। उनका कहना कि महापुरुषों के नाम पर स्कूल बंद करने की परंपरा ठीक नहीं है। बल्कि उस दिन स्कूलों में ऐसे कार्यक्रम होने चाहिए जिनसे बच्चे उन महापुरुषों के संघर्ष व कार्यों को जान सके। उनके जीवन से कुछ प्रेरणा ले सकें। समझ सके कि किस तरह वे महापुरुषों की श्रेणी में अपना नाम दर्ज करा पाए। निश्चित ही उनकी यह सोच ऐतिहासिक व सराहनीय  है। वहीं अब अंबेडकर जयंती के अवसर पर अपनी कही बात पर अमल करते हुए योगी आदित्यनाथ ने चौथी कैबिनेट की बैठक में प्रदेश की 15 छुट्टियों को रद्द कर दिया है। 

आज तक सभी राजनीतिक पार्टियों ने वोट बैंक बटोरने के लिए महापुरुषों के नाम पर छुट्टियों  का ऐलान किया । लेकिन योगी आदित्यनाथ ने इस तरह की राजनीति से इतर अपनी इस बात से एक नई मिसाल कायम कर दी है। इससे कम से कम छुट्टियों के नाम पर हो रही राजनीति पर तो लगाम लग सकेगी।


 वे जानते है कि उनके इस फैसले से कुछ लोगों को आपत्ती होगी। इस फैसले का मूल कारण उन्होंने बताया कि कई बार गांवों में जाने पर बच्चों से पूछा कि स्कूल क्यों नहीं गए तो वे कहते हैं कि आज इतवार है। यह याद दिलाने पर कि इतवार नहीं है बस इतना बता पाते हैं कि आज स्कूल में छुट्टी है। तो ऐसी छुट्टियों का क्या फायदा जिनका बच्चे अर्थ ही न समझ पाए। स्कूलों में जयंती पर कार्यक्रम कराना एक उचित फैसला है। क्योंकि छुट्टियों से तो बच्चों का सिर्फ नुकसान ही होता है। साल में 220 दिन विद्यालय चलने चाहिए लेकिन छुट्टियों के कारण 120 दिन से ज्यादा चल नहीं पा रहे हैं। दुनिया भर में सबसे ज्यादा सार्वजनिक छुट्टियां भारत में होती है। भारत में 21 सार्वजनिक छुट्टियां  है। भारत में भी सबसे ज्यादा यूपी में होती है। इन छुट्टियों की वजह से कई स्कूलों में कोर्स अधूरा रह जाता है जिससे बच्चों का शैक्षाणिक नुकसान होता है।

 कर्पूरी ठाकुर का जन्मदिन, चंद्रशेखर आजाद की जयंती, चरण सिंह का जन्मदिन, हजरत अली और ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का जन्मदिन, राणा प्रताप जयंती, परशुराम जयंती, महर्षि कश्यप व महाराज गुहा, चेटी चंद, रमजान का अंतिम शुक्रवार, विश्वकर्मा पूजा, अग्रसेन जयंती, बाल्मीकि जयंती, छट पूजा पर्व,वल्लभ भाई पटेल और नरेंद्र देव जयंती, ईद-उ- मिलादुन्नवी  छुट्टियों को रद्द कर दिया गया है। इससे कैलेंडर में छुट्टियां कम हो गई, स्कूल खुलने वाले दिनों में 15 दिन की बढ़ोतरी हो गई। जिसका फायदा बच्चों को अवश्य मिलेगा और इन महा पुरूषों के बारे में कुछ सीख भी पाएंगे जो बच्चों के समग्र विकास में सहायक सिध्द होंगे।   


स्कूलों में कार्यक्रम होने से बच्चे महापुरुषों के संघर्ष को जान सकेंगे। देश के लिए उनके द्वारा किए गए त्याग व बलिदान को समझ सकेंगे। साथ ही उनके संघर्षशील जीवन से कुछ सीख ले सकेंगे। आज के बच्चे ही कल देश के नेता और बड़े अधिकारी बनेंगे और देश की कमान इन्हीं के हाथों में होगी। अगर आज बच्चों से महापुरुषों के बारे में पूछा जाए तो वह उनके बारे में  शायद ही कुछ जानते हों। लेकिन अब स्कूलों में बच्चें महापुरुषों के जीवनी से रूबरू हो सकेंगे । इससे उनके अंदर  देश के प्रति सम्मान, आदर, राष्ट्रीय भावना का विकास होगा । बच्चे उनके जीवन से प्रेरित होकर उनके जैसा बनने की कोशिश करेंगे। इससे निश्चित तौर पर यह कहा जा सकता है कि आने वाले समय पर हमारा राष्ट्र सुरक्षित हाथों में रहेगा।



योगी आदित्यनाथ की इस बात से मनमानी छुट्टियों पर लगाम लगेगी। स्कूलों में कार्यक्रम होने से बच्चों को कुछ  सीखने का मौका भी मिलेगा। हम इस तरह देश के सुनहरे भविष्य की कामना कर सकेंगे। क्योंकि देश का भविष्य तो आज के स्कूली बच्चे ही हैं। स्कूलों में आयोजित इस तरह के कार्यक्रम से बच्चे महापुरुषों से प्रेरित होकर उनके जैसा कुछ करने का लक्ष्य स्थापित करेंगे। साथ ही  उज्जवल भविष्य की ओर बढेंगे। लेकिन यह सफलता तभी मिलेगी जब सरकार इन कार्यक्रमों में भी उतनी ही तात्परता दिखाए जितना कि फैसले में दिखाया । स्कूलों में कार्यक्रम किए भी जा रहे हैं या फिर नहीं इन सबका का औचक निरीक्षण भी किया जाए , तभी इस फैसले के उद्देश्यों को पाया जा सकता है। 

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