शोर-शराबे पर लगे लगाम
हमारे समाज में अगर मस्ती की बात आए तो शादी का समय उसके लिए सबसे ऊपर आता है। शादियों के सीजन में मौज मस्ती जायज है। लेकिन उस मौज मस्ती के साथ बढ़ता ध्वनि प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक होता है, साथ ही लोगों को परेशान भी करता है।
जैसा कि सब को पता है कि मार्च से लेकर मई का महीना शादियों की तारीख से भरा रहता है। वहीं लोग यह भी जानते हैं कि इन्हीं महीनों में परीक्षाएं भी होती हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुछ नियम बनाए हैं। जैसे कि रात को 10 बजे के बाद शादियों में कोई पटाखों का प्रयोग नहीं करेगा, मंदिर मस्जिद या किसी भी धार्मिक स्थल में लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होगा, यदि घर में कोई आयोजन है तो 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर का प्रयोग करना सख्त मना है। लेकिन सारे नियमों को ताक पर रखते हुए लोग अपनी मनमानी करते रहते हैं। बारात चाहे रात को 9 बजे निकले या 12 बजे के बाद लोग उसी धूम-धाम और शोर शराबे के साथ निकलते हैं। इस तरह से वह सिर्फ नियम ही नहीं तोड़ते बल्कि लोगों को परेशान भी करते हैं।
मार्च-अप्रैल के महीने में 12वीं की बोर्ड, यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं होती हैं। लगभग सभी लोग रात में ही पढ़ाई करते हैं। ऐसे में जब बारात निकलती है तो उसके शोर-शराबे से लोगों को काफी परेशानी होती है।
नियम तो बने हुए हैं लेकिन उन पर अमल कोई नहीं करता है। ना ही इस तरफ प्रशासन ध्यान देता है। यह बात तो किसी से नहीं छुपी हुई है कि रात को 12 बजे के बाद भी लाउड स्पीकर का प्रयोग जारी रहता है।
हाल ही में मशहूर गायक सोनू निगम ने मस्जिद में आजान से होने वाली आवाज का विरोध किया। जिसके लिए उन्हें बहुत भला बुरा कहा गया। पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक युनाइटेड काउंसिल के एक वरिष्ठ सदस्य का बयान दिया है, 'यदि कोई उनका सिर मुंडवा कर, उनके गले में जूते की माला डालकर देश में घुमाएगा तो मैं खुद उस शख्स के लिए 10 लाख रुपये के पुरस्कार का एलान करता हूं। हालांकि बाद में सोनू निगम ने अपना सिर मुंडवाकर यह सिद्ध किया कि वह कुछ गलत नहीं कह रहे और अपनी बात पर वह टिके हुए हैं। आखिर सोनू निगम ने क्या गलत कहा था। उन्होंने तो सिर्फ जो नियम बने हुए उनका पालन करने के लिए कहा था। जिसके लिए उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया गया।
प्रशासन को हमेशा हो रही ऐसी मनमानी को रोकने के लिए कुछ प्रयास करने चाहिए। जो नियम बने हुए हैं पहले से कम से कम लोग उन पर अमल करें इसके लिए कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए।
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