आधुनिक युग ने
छीना पारिवारिक सुख
परिवार ही स्वर्ग है, माता - पिता ही भगवान
ये बातें सब सुनकर ही अब सब होते परेशान
लगता सबको है ये प्रवचन, लगता है ये झाम
इस लेख को पढ़ लगेगा आपको ये सब है आम
प्राचीन समय में
लोगों के लिए सबसे ज्यादा आरामदायक व मनोरंजक जगह उनका घर होता था। बडों को आॅफिस व
बच्चों को स्कूल से लौटने की जल्दी होती थी कि घर जाकर वह सबके साथ बैठेंगे। यही
मुख्य कारण था कि पहले के समय में ज्यादातर संयुक्त परिवार होते थे। इससे
पारिवारिक एकता भी बनी रहती थी।
वहीं अब माता - पिता और बच्चों के पास एक दूसरे
के लिए समय ही नहीं होता है। यही कारण है कि वह दोनों एक दूसरे को समझ ही नही
पाते। मार्डन भाषा में इसे‘‘जनरेशन गैप‘‘
का नाम दिया गया है। ऐसे में संयुक्त परिवार का
तो सवाल ही नही उठता है।
जी हां इसमें कोई
दो राय नहीं की बदलते युग के साथ-साथ रिश्तों के मायने भी बदल रहें है। माता -
पिता अपने आप को मार्डन दिखाने के लिए बच्चों पर ध्यान ही नही देते है। वह कहते
हैं कि वह उन्हें ‘‘स्पेस‘‘ दे रहें है। पर असल में तो जिसे वह स्पेस देना
कहते हैं वही रिश्तों में बढ़ रही दूरियों का कारण है। माता - पिता को बच्चों को
स्पेस जरूर देना चाहिए साथ ही सावधानी भी बरतनी चाहिए।
वहीं जहां माता -
पिता अपनी जिम्मेदारी समझते हैं तो बच्चे कहते हैं कि वह उनकी लाइफ में ‘‘इंटरफेयर‘‘ कर रहें हैं। बच्चे सोचते हैं कि माता - पिता का हर बात में
पूछताछ करने से , उनकी जिंदगी
में दखल देने से उनकी प्राइवसी खत्म होती है। इस कारण वह अपने माता - पिता को
पिछड़ी सोच का समझने लगते हैं।
असल में तो
जनरेशन गैप, स्पेस, व इंटरफेयर जैसे शब्द रिश्तों में बढ़ती दूरियों
को ढ़कने का काम करते हैं। इन बढ़ती दूरियों के और भी बहुत से कारण हैं आज हम उन्हीं
पर बात करते हैं-
सोशल मीडिया:
सोशल मीडिया एक
तरफ तो दुनिया के साथ कदम से कदम मिला कर चलने के लिए बहुत ही लाभदायक माध्यम है।
वहीं दूसरी तरफ यह परिवार में बढ़ती दूरियों का कारण भी है। पहले लोग मनोरंजन के
लिए परिवार के साथ में पिकनिक या फैमिली गेटटुगेदर प्लान करते थे। वहीं आज उनके
मनोरंजन का साधन सोशल साइट्स पर चैट करना है। घर लौटने के बाद भी परिवार में किसी
भी सदस्य के पास एक दूसरे के लिए समय ही नहीं होता है। यही कारण है कि माता - पिता
यह जान भी नहीं पाते है कि बच्चों के जीवन में क्या चल रहा है। मनुष्य के लिए सोशल
मीडिया के इस्तेमाल के बिना आज के समय में सर्वाइव करना बहुत मुश्किल है पर इसका
अत्यधिक इस्तेमाल रिश्तों को मुश्किल में ला सकता है।
मनोरंजन के लिए
फोन का इस्तेमाल करना:
आज चाहें छोटे
बच्चे हों या बड़े सभी मूड फ्रेश करने के लिए फोन का ही इस्तेमाल करते हैं। बड़े लोग
फोन पर ही गाने , मूवीज डाउनलोड कर
लेते हैं वहीं बच्चे पूरा समय फोन पर गेम खेलकर बिता देते हैं। पहले के समय में कम
से कम टीवी देखने के बहाने लोग एक दूसरे के साथ बैठते तो थे पर अब लोगों के लिए
उनका फोन ही टीवी बन गया है। घर लौटने के बाद परिवार में लोग एक दूसरे के साथ
बैठकर समय बिताते थे। एक दूसरे के साथ अपनी दिनचर्या शेयर करते थे। जिससे कि वह एक
दूसरे के करीब भी रह पाते थे। पर अब हमारे जीवन में परिवार के सदस्यों की जगह फोन
न ले ली है।
आॅनलाइन शापिंग:
परिवार के
सदस्यों का एक साथ घूमने के लिए शापिंग एक बहुत सरल माध्यम था। इससे उनका काम भी
हो जाता था और एक दूसरे के साथ समय बिताने का मौका भी मिलता था। आज जहां नई
टेक्नोलोजी के साथ समय बचता है वहीं इसकी वजह से लोग अपने परिवार वालों के लिए समय
भी नहीं निकालते हैं। क्योंकि उनका सारा काम तो घर बैठे ही हो जाता है। अब वह शापिंग के लिए बाहर जाने के बजाय फोन से ही सामान मंगा लेते हैं।
यह कुछ आम कारण हैं जिनकी वजह से आज परिवार
में दूरियां बढ़ रही हैं। परिवार के सदस्य एक दूसरे के साथ समय न बिताने की वजह से
एक दूसरे को समझ ही नहीं पाते हैं। जिस भारत में पहले संयुक्त परिवार की मिसालें
दी जाती थी वहीं अब संयुक्त परिवार देखने को ही नहीं मिलते हैं। बदलते समय के साथ
बदलना सही है पर बदलाव सकारात्मक रहें तो अच्छा है।
इस समस्या के
आकलन के लिए आज हमने कुछ परिवारों के अलग - अलग सदस्यों से बात की जिससे की
उपरोक्त सभी कारण कितने सही है यह सिद्ध हुआ -
नौबस्ता के शर्मा
परिवार ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके यहां पांच लोग रहते हैं । मम्मी पूरा दिन
घर के काम करती हैं और जो समय बचता है उसमें वह टीवी प्रोग्राम देखती हैं। वहीं
बड़ी बेटी स्कूल में टीचर है। वह स्कूल से लौटने के बाद शाम का समय दोस्तों के साथ
चैट करके निकालती हैं। हालांकी वह पहले वह अपने घरवालों के साथ शापिंग पर जाती थी
पर अब वह ज्यादातर आॅनलाइन शापिंग कर ही अपना सामान मंगा लेती हैं। वहीं उनका छोटा
भाई स्कूल से लौटने के बाद का पूरा समय गेम खेलकर निकाल देता है।
किदवईनगर में रह रहे
शुक्ला परिवार में चार लोग, माता, पिता बेटा व बेटी हैं। उन्होंने बताया की बच्चे
घर लौटकर असाइनमेंट्स कंप्लीट करते हैं। फिर उसके बाद दोस्तों से फोन पर बात करते है
या गेम खेलते रहते हैं। यहां तक की साथ में टीवी भी नहीं देखते हैं फोन पर ही
मूवीज डाउनलोड कर लेते हैं। वहीं पिताजी भी घर लौटने के बाद वाट्सएप और फेसबुक में लगे रहते हैं।
परिवार कैसे बनाएं रखे:
आज के समय में अब
बच्चों को परिवार का महत्व बताना बहुत जरूरी है। नहीं तो आगे आने वाले समय में वह
भूल जाएंगे कि परिवार शब्द होता क्या है। इसके लिए अगर नीचे दी गई कुछ बातों का
अनुसरण करेे तो वह अपने बढ़ते स्पेस को कम कर सकेंगे -
- रोज सुबह की चाय व रात का डिनर साथ में ले। इससे वह एक दूसरे के साथ बैठ भी पाएंगे और एक दूसरे से बातचीत भी पर पाएंगे।
- मनोरंजन के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार बाहर घुमने या मूवी जाने का प्लान करें। बाहर नही भी जा सकते हैं तो घर पर ही एक साथ बैठकर मूवी देखने की प्लानिंग करें।
- जब भी शापिंग करनी हो तो साथ में ही बाहर जाने की कोशिश करें
- मंथली पिकनिक या कहीं बाहर के लिए ट्रिप प्लान किया करें।
- कुछ महीनों के अंतर में फैमिली फोटो खिंचवाने का प्रयास भी किया करें।
- वीकेंड में घर में ही गेम एक्टीविटीज करें।
- माता - पिता ऐसा माहौल बनाएं कि बच्चे उनसे हर प्रकार की बात शेयर कर सकें।
ऐसे कुछ उपायों
से उन्हें एक दूसरे के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा और साथ ही वह एक दूसरे को
समझ भी पाएंगे। इस तरह परिवार के मायने भी नहीं बदलेंगे जो की आधुनिक युग के साथ
बदलते हुए नजर आ रहें हैं।








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