इंसा नही इंसानियत के काबिल


                                              इंसा  नही इंसानियत के काबिल     

25 जून को डेरा प्रमुख राम रहीम के दोषी करार दिए जाने के बाद अब राम रहीम को दो रेप के मामलों में 20 साल की सजा दी गई है। इसके मुताबिक अगले 20 साल तक नहीं उसे अपने किए का भुगतान करना पड़ेगा। सालों से लोगों का भगवान बना राम रहीम तो एक सच्चा इंसान भी न साबित हुआ। इसके साथ ही  उसके और भी कई कारनामें सामने आए और आरोप लगे। राम रहीम पर अपनी सच्चा डेरा के आदमियों को नपुंसक बनाने और कई अन्य युवतियों का शोषण करने की बात सामने आई। वैसे भी कहते कि पाप का घड़ा कभी ना कभी भरता जरूर है। यह बात राम रहीम ने जरूर अपने किसी ने किसी प्रवचन में जरूर कही होगी। तब वह यह नहीं जानते होंगे कि उनके पाप का घड़ा भी करेगा। हालांकि इस फैसले के साथ यह बात भी साबित हो गया कि हमारे देश में कानून ही सबसे बड़ा है। चाहे किसी का आैधा कितना भी बड़ा हो लेकिन उसे अपनी की गई गलतियों की सजा जरुर मिलती है।
इंसा को दोषी करार दिए जाने के बाद उसके समर्थक कौन है काफी बवाल किया। इस मामले के बाद में एक बहुत गहरा सवाल उमड़कर आया आखिर लोग जिन्हें भगवान मानते हैं, वह इतने बड़े शैतान कैसे हो सकते है? हमारे देश में लोगों को भगवान बनाना एक आम बात है,  लेकिन अगर आश्चर्यजनक बात कोई है तो वह यह कि उनके भक्त उनकी गलती जानने के बाद भी उन्हें  भगवान की पदवी पर कैसे रख सकते है?  वह कैसे भूल जाते हैं की असल भगवान अपने भक्तों को दुख में नहीं देख सकता और ना ही किसी की तकलीफ का कारण बन सकता है। लोग यह भूल जाते हैं कि आज उनके भगवान की वजह से जो लोग दुख में हैं या जिन लोगों को तकलीफ सहनी पड़ी है उनकी जगह वह भी हो सकते थे। लेकिन हकीकत में जब लोगों पर जब खुद बितती है तभी वह किसी की तकलीफ समझ सकते हैं। लोगों को यह समझना चाहिए किसी की भक्ति करना तो सही है लेकिन उसे भगवान बनाकर खुद अंधभक्त बनना गलत है।

No comments:

Post a Comment

मैंने सोचा न था

जिंदगी का रुख यूं बदल जाएगा मैंने सोचा न था वक्त मेरा यूं बदल जाएगा मैंने सोचा न था कल तक चली थी जिन सपनों की डोरी को थाम कभी वो सपना ...