सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
हाल ही में शिक्षामित्रों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिये
गये फैसले से यह बात साफ हो चुकी है कि शिक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया
जाएगा। 2013 में हुए शिक्षामित्रों के समायोजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट
के फैसले के अनुसार समायोजन रद्द कर दिया गया है। इस फैसले के अनुसार समायोजन के
बाद जो शिक्षामित्र सह अध्यापक बने थे उन्हें उनके पद से हटा दिया गया है। फैसले
के अनुसार अब शिक्षामित्रों को अपना सह अध्यापक का पद पाने के लिए पूरी योग्यता
हासिल करनी होगी। भविष्य में प्रदेश की
शिक्षा व्यवस्था के लिए यह एक उचित फैसला साबित हो सकता है।
26 मई 1999 को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक
आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत शिक्षामित्र नियुक्त किए गए थे। यह भर्तियां दिन
प्रतिदिन घट रहे शिक्षक और छात्रों का अनुपात को ठीक करने के उद्देश्य की गई थी। 1 जुलाई 2001 को सरकार ने एक और आदेश जारी कर
इस योजना को और विस्तृत रुप प्रदान किया। सरकार ने जून 2013 में 172000 शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक
के तौर पर समायोजित करने का निर्णय लिया। सरकार के इस फैसले से उस समय
शिक्षामित्रों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। सरकार ने अपने लिए गए इस फैसले के दौरान
इस बात पर विचार ही नहीं किया कि जिन शिक्षामित्रों को वह सहायक शिक्षक का पद देने
जा रहे हैं, क्या वह
इस पद के योग्य है भी या नहीं? वहीं इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई
जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने जरूरी योग्यता ना होने पर 12 सितंबर 2015 को शिक्षामित्रों का समायोजन
रद्द कर दिया था। हालांकि इस फैसले का विरोध करते हुए शिक्षामित्र व राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गए थे। वहीं
कोर्ट में यह मामला कुछ समय के लिए लंबित रहा। फैसला लंबित रहने के दौरान
172000 में से 138000 शिक्षामित्र सहायक शिक्षक के पद
पर समायोजित कर दिए गए।
वहीं समायोजन के बाद इतने समय
से लंबित रहे मामले में आए फैसले से शिक्षामित्रों को बड़ा झटका लगा है। जहां
कोर्ट ने समायोजन रद्द करने का फैसला लिया है वहीं कोर्ट ने शिक्षामित्रों को एक
राहत भी दी है। शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक का पद दोबारा पाने के लिए जरूरी
योग्यता हासिल कर दो भर्तियों में भाग लेने का मौका देने के लिए भी कहा है। साथ ही
उनके अनुभव को भी प्राथमिकता देने की बात कही है। वहीं दूसरी ओर जो शिक्षक टीईटी
की बजाय एकेडमिक मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उन सहायक शिक्षकों को राहत प्रदान
की गई है। साथ ही यह भी साफ कर दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर
टीईटी की मेरिट के आधार पर नियुक्त हो चुके 66655 सहायक अध्यापकों की भर्ती को
नहीं छेड़ा जाएगा।
असल में इस ओर ध्यान तब दिया गया जब योग्य शिक्षक बेरोजगार
थे और अयोग्य व्यक्ति शिक्षक बने हुए थे। प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे लगभग
शिक्षकों को सही शब्द तक लिखने नहीं आते थे। ऐसे में यह सोचने वाली बात थी कि आखिर ऐसे
शिक्षकों से बच्चे किस प्रकार की शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। इस प्रकार की शिक्षा
व्यवस्था के अनुसार शिक्षा का स्तर दिन-प्रतिदिन नीचे ही जा रहा था। ऐसे में
सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया गया यह फैसला महत्वपूर्ण साबित हुआ। अब फैसले के अनुसार
जबकि समायोजन रद्द कर दिया गया है ऐसे में बिना योग्यता के कोई भी व्यक्ति सह
अध्यापक का पद नहीं पा पाएगा। साथ ही भविष्य के लिए भी इस तरह की स्थितियों से बचा
जा सकेगा।
भविष्य के लिए यह फैसला लाभकारी साबित होगा क्योंकि यदि
छात्रों को शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षक योग्य होंगे तो निश्चित बच्चे अच्छी शिक्षा
पा सकेंगे। शिक्षक यदि योग्य ही नहीं होंगे तो बच्चे कैसी शिक्षा प्राप्त करेंगे
इस बात का अंदाजा तो लगाया ही जा सकता है। आज के बच्चे देश के लिए उसका कल का
भविष्य है। वह हमारे देश की आने वाली पीढी है। यदि आज उनकी शिक्षा के साथ खिलवाड़ होता है तो यह देश के
भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
इस बात से कोई अनजान नहीं है कि किसी भी देश के लिए उसकी
शिक्षा व्यवस्था ही उस का दर्पण होती है। इसीलिए शिक्षा के उच्च प्रतिमान गठित किए
जाते हैं ताकि देश का विकास हो सके। यदि शिक्षा का उचित स्तर नहीं है तो वह देश की
तरक्की के पथ पर अधिक समय तक आगे नहीं बढ़ सकता है। देश की तरक्की में
उसकी शिक्षा व्यवस्था का बहुत बड़ा योगदान होता है क्योंकि आज के समय में अन्य
किसी भी देश के शिक्षा स्तर से कोई अनजान नहीं है। देश का विकास उसकी शिक्षा
व्यवस्था पर निर्भर होता है। ऐसे में यदि देश में उचित शिक्षा व्यवस्था नहीं
स्थापित करी जाएगी तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि अन्य देशों के मुकाबले देश पिछड़ता ही चला जाएगा।
वहीं अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द करने के फैसले के
विरोध में मौजूदा शिक्षामित्र स्कूल नहीं खोल रहे हैं। इस तरह प्रदेश के लगभग हजार
स्कूल प्रभावित हो रहे हैं। वही कई प्रदेशों में शिक्षामित्रों ने धरना देकर अपनी
मुश्किलों का हल मांगा है। इसके लिए प्रदेश सरकार को जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण कदम
उठाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले के अनुसार जल्द से जल्द
अखबारों में भर्तियों के लिए विज्ञापन देकर रिक्त पदों को भरें। ताकि इसके कारण
पढ़ाई बहुत अधिक प्रभावित ना हो।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि मौजूदा शिक्षामित्र जोकि
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित हुए हैं वह निराश हैं परंतु उनके पास अभी भी
मौका है वह जरूरी योग्यता हासिल करें और दो भर्तियों में शामिल होकर अपना पद
दोबारा पा सकते हैं। साथ ही यूपी सरकार ने यह आश्वासन भी दिलाया है कि समायोजन
रद्द होने के बाद भी किसी को नौकरी से नहीं हटाया जाएगा। ऐसी परिस्थितियों में सभी
शिक्षा मित्रों को धैर्य से काम लेना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान
करते हुए उचित प्रयास करने चाहिए ताकि वह अपना पद वापस पा सकें।

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