कानपुर के गढ्ढों की मनोदशा

कानपुर के गढ्ढों की मनोदशा


बाबू जी धीरे चलना
कानपुर के रास्तों पर जरा संभलना
हां यहां बड़े गढ्ढे है, बड़े गढ्ढे हैं
हर चौराहे पर
बाबू जी धीरे चलना
कानपुर के रास्तों पर जरा संभलना

सुबह निकले रास्ते पर सज सवर के
पापा आॅफिस व बच्चे स्कूल को
रास्तों के गढ्ढे चीख चीख बोले
चलते हो सब मुझ पर रोजाना
भला कोई हालत मेरी भी तो देखो

सरकार बदली मिली उम्मीद
बोले पंद्रह जून 2017
तक सवार देंगे रास्तों के गढ्ढों के हाल
तारीख आई चली  भी गई
पर हालत रही वहीं की वहीं 
बदले न मेरे हाल चाल

अब तो बस करते हैं इंतजार
कि होए दौरा किसी मंत्री का
दिखावा सही पर सुधारे जाएं मेरे हाल
वरना तो रहना है हमें यूं ही बदहाल
किसी को न आएगा हमारा ख्याल


इसीलिए बाबू जी धीरे चलना
कानपुर के रास्तों पर जरा संभलना
हां यहां बड़े गढ्ढे है, बड़े गढ्ढे हैं
हर चौराहे पर
बाबू जी धीरे चलना
कानपुर के रास्तों पर जरा संभलना

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