जिंदगी के अनमोल रिश्ते

जन्म होते ही बनते रिश्ते
जिंदगी के अनमोल रिश्ते
पालने में झुलता बचपन
नए रिश्ते संजोता बचपन

औलाद बनकर जन्म लिया
संग कई रिश्तों को जन्म दिया
पाकर तुझको सब हुए प्रसन्न
खुशियों से भर गया आंगन

फिर स्कूल पहुंचा जब बचपन
दोस्ती की ओर बढ़े तेरे कदम
रबर पेंसिल को हर पल झगड़े
पर छुट्टियों में मिलने को तरसे

फिर आगे बढ़े जब तेरे कदम
जग ने जोड़ा एक नया बंधन
दामपत्य जीवन में होकर मग्न
चल दिये एक दूजे के संग

फिर समय ने खुद को दोहराया
दे औलाद अब तुझे मां बाप बनाया
अब बुढ़ापे की ओर बढ़ाए कदम
नाती पोतों में तुम हुए मग्न

सुख दुख से भरा ये जीवन
अनमोल रिश्तों में रहे मग्न
ऐसे ही बढ़ता जाए ये जीवन
नए रिश्तों का है ये संगम

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